इसरो बनाएगा एक और स्पेसपोर्ट-

ISRO will build another spaceport

इसरो बनाएगा एक और स्पेसपोर्ट


इसरो बनाएगा एक और स्पेसपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी इसरो के दूसरे स्पेसपोर्ट की आधारशिला
तमिलनाडु के थुथुकुड़ी जिले में बनेगा इसरो का दूसरा स्पेसपोर्ट

Prime Minister Narendra Modi laid the foundation stone of ISRO’s second spaceport ISRO’s second spaceport to be built in Thoothukudi district of Tamil Nadu

             प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम में एक और मील का पत्थर स्थापित किया | उन्होंने बुधवार को थुथुकुड़ी जिले के कुलसेकरपट्टिनम में भारतीय अनुसन्धान संगठन (इसरो ) के दूसरे स्पेसपोर्ट की आधारशिला रखी|

                Prime Minister Narendra Modi established another milestone in the country’s space exploration programme. He laid the foundation stone of the second spaceport of the Indian Space Research Organization (ISRO) at Kulasekarapattinam in Thoothukudi district on Wednesday.

छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एस एस एल वी )मिशनों में होगा उपयोग-

Will be used in Small Satellite Launch Vehicle (SSLV) missions

इसरो ने बताया कि दुसरे स्पेसपोर्ट का उपयोग विशेष रूप से केवल छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एस एस एल वी ) मिशनों को लॉन्च करने के लिए किया जायेगा ताकि उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में रखा जा सके |

यह देश के अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयास को भौगोलिक लाभ प्रदान करेगा |
श्रीहरिकोटा का स्पेस पोर्ट पीएसएलवी, जी एस एल वी, एल एम वी -3 और अन्य मिशनों समेत सभी रॉकेट लांच मिशनों के लिए प्राथमिक केंद्र रहेगा |

ISRO said that the second spaceport will be used exclusively to launch only small satellite launch vehicle (SSLV) missions so that satellites can be placed in low Earth orbit.

This will provide geographical advantage to the country’s space exploration efforts.

The space port at Sriharikota will be the primary hub for all rocket launch missions including PSLV, GSLV, L M V-3 and other missions.

इसरो बनाएगा एक और स्पेसपोर्ट

इसरो का दूसरा स्पेसपोर्ट-2233 एकड़ में बनेगा 

ISRO’s second spaceport will be built on 2233 acres.

      इसरो का दूसरा रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र लगभग 2233 एकड़ क्षेत्र में लगभग 950 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा और यह देश की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा में एक नए युग की शुरुआत करेगा| यह लगभग दो वर्षों में बनकर पूरी तरह  तैयार हो जायेगा|

         ISRO’s second rocket launch center will be built in an area of ​​about 2233 acres at a cost of about Rs 950 crore. And it will usher in a new era in the country’s space exploration journey. It will be completed in about two years. the bottom will be ready.

ईंधन की खपत होगी कम(fuel consumption will be less)
इसरो ने स्पेसपोर्ट के लिए कुलसेकरपट्टिनम को ही क्यों चुना
Why did ISRO choose Kulasekarapattinam for the spaceport.
                  कुलसेकरपट्टिनम का रणनीतिक महत्व यह होगा कि यह उपग्रह प्रक्षेपण के दौरान ईंधन की खपत को काम करेगा|
श्री हरिकोटा से लॉन्च के किये दक्षिण पूर्व प्रक्षेप वक्र की आवश्यकता होती है,इसके विपरीत कुलसेकरपट्टिनम से उपग्रहों का प्रक्षेपण सीधे ही दक्षिण दिशा की ओर संभव होगा, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन का संरक्षण होगा |

                  The strategic importance of Kulasekarapattinam will be that it will reduce fuel consumption during   satellite launches. Launch from Sri Harikota     requires a south-east   trajectory, where as from Kulasekarapattinam, satellites can be launched directly towards the south, resulting in fuel conservation.

केवल निजी क्षेत्र के लिए ही होगा उपयोग(Will be used only for private sector)

          थुथुकुड़ी जिले में बनने वाला यह प्रक्षेपण केंद्र लॉन्च के लिए समर्पित होगा | इस लॉन्च पैड का उपयोग केवल निजी क्षेत्र द्वारा किया जायेगा |यहाँ से इसरो के रॉकेट लॉन्च नहीं होंगे |इसका निर्माण पूर्ण होते ही इसे निजी क्षेत्र को सौंप दिया जायेगा|

               This launch center to be built in Thoothukudi district will be dedicated for launches. This launch pad will be used only by the private sector. ISRO’s rockets will not be launched from here. As soon as the construction is completed, it will be handed over to the private sector.

क्या है एस एस एल वी प्रक्षेपण यान(What is SSLV launch vehicle?)

                   एस एस एल वी प्रक्षेपण यान 3- चरणों वाला प्रक्षेपण यान है, जो 500 किलोमीटर की समतलीय कक्षा में लगभग 500 किलोग्राम वजनी उपग्रहों को लांच करने में सक्षम है|

                  The SSLV launch vehicle is a three-stage launch vehicle capable of launching satellites weighing approximately 500 kg into a 500 km planar orbit.

SSLV

जय हिन्द जय भारत जय विज्ञान जय इसरो

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